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Thursday, 15 March 2018

सबसे बड़े लोकतंत्र का आम चुनाव


चुनाव आयोग द्वारा मतदान की तारीखों की घोषणा के साथ ही भारत में आम चुनाव (लोकसभा चुनाव) को रणभेरी बज उठी है। चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव की घोषणा कर देश में 16वीं लोकसभा के गठन की प्रक्रिया को प्रारंभ कर दिया है। देश में 16वीं लोकसभ के लिये कुल नौ चरणों में मतदान होगा। इसका पहला चरण 7 अप्रैल से शुरू होगा और अंतिम चरण 12 मई को होगा। 16 मई को पूरे देश में वोटों की गिनती कर परिणामों की घोषणा होगी। इस दिन भारत हो नहीं बल्कि दुनियाभर में लोगों की नजर विश्‍व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के सियासी घटनाक्रम पर रहेगी। इस बार के चुनाव की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पिछले लोकसभा चुनाव 2009 के मुकाबले 12 करोड़ से अधिक युवा मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग करेंगे। इत तरह भारत में लोकसभा चुनाव 2014 के नौ चरणों के मतदान में 81 करोड़ से अधिक मतदाता अपने लिये नई सरकार के साथ-साथ अपने भविष्‍य की दिशा भी चुनेंगे। इस बार नोटा (नन ऑफ द अबव) का विकल्‍प भी मतदाओं के पास होगा यानि किसी भी प्रत्‍याशी को न चुनने का अधिकार भी अब आमजन के पास होगा। देश में चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से और निष्‍पक्ष रूप से सम्‍पन्‍न हो इसके लिये चुनाव आयोग पूरी तरह मुस्‍तैद है। यह चुनाव आयोग की निष्‍पक्षता का ही परिणाम है कि अन्‍य विकासशील देशों में तरह हमारे देश में चुनाव परिणामों पर सवाल नहीं उठाया जाता है। चुनाव की घोषणा के साथ ऐसे कई प्रश्‍न हमारे सामने हैं जिनका जवाब 16 मई को ही मिलेगा। मतदाताओं का फैसला सरम्‍परागत राजनीतिक दलों की हदों तक सिमटा होगा या वे नये विकल्‍पों के प्रति आकर्षित होंगे। लगभग 12 करोड़ नये युवा मतदाताओं का रुझान कितना प्रभावित करेगा।

भारत की जनता के सामने अतीत में जब भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं उन्‍होंने इनका जवाब परिपक्‍वता और समझादारी से दिया है। उन्‍होंने उपलब्‍ध विकल्‍पों के बची सर्वश्रेष्‍ठ का चुनाव किया है। यह हमारे मतदाताओं की बुद्धि कोशल का पिरणाम है कि भारतीय लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था पर कभी भी आशंका के बादल नहीं छाये। भारतीय लोकतंत्र एक विश्‍वासीनय और जनप्रिय व्‍यवस्‍था के लिए जाना जाता है। भारत जैसे अन्‍य विकासशील देशों में लोगतांत्रिक व्‍यवस्‍था इतनी कामयाब नहीं हुई जितनी कि हमारे देश में है। अगर हम अपनी भाषायी, क्षेत्रीय, धार्मिक, नस्‍लीय एवं जातीय विभिन्‍नताओं पर गौर करें तो अपने देश की यह आधुनिकता शासन प्रणाली किसी चमत्‍कार से कम नहीं लगती और शायद यह हमारी पहचान भी है। 7 अप्रैल से 16 मई तक हम इसी अनूठे करिश्‍मे का नजारा एक बार फिर देखेंगे। भारत दुनिया का बड़ा प्रजातंत्र है और इतने विशाल देश में विश्‍वसनीय ढंग से निष्‍पक्ष चुनाव कराना आसान काम नहीं है, लेकिन ये हमारे लिय गौरव की बात है कि हर नये चुनाव के साथ हमारा लोकतंत्र और भी मजबूत होता गया है।

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Tuesday, 13 March 2018

खरपतवारों के संरक्षण की ज़रूरत


द‍ुनिया भर में आज पौध संवर्धक फसलों के जंगली सम्‍बंधियों पर खासा ध्‍यान दे रहे हैं। कारण यह है कि इन्‍हीं जंगली सम्‍बंधियों के बल पर हम फसलों की ऐसी नई किस्‍में तैयार करने की उम्‍मीद कर सकते हैं जो जलवायु परिवर्तन का सामना कर सकें। दरअसल फसल सुधार की दृष्टि से फलों के ये जंगली सम्‍बंधी ही सबसे महत्‍वपूर्ण जिनेटिक संसाधन हैं। मगर इस संसाधन की हालत पतली है और यह चिंता का विषय है। 

हाल ही में तैयार की गई एक रिपोर्ट दर्शाती है कि बीच बैंकों में दुनिया भर की 29 अति महत्‍वपूर्ण फसलों के जंगली सम्‍बंधी पौधों का संरक्षण ठीक से नहीं हो रहा है। फसलों से 455 जंगली सम्‍बंधियों के एक विश्‍व व्‍यापी अध्‍ययन में पता चला है कि 54 प्रतिशत तो जीन बैंक में मौजूद ही नहीं हैं। इनमें से कई तो विलुप्‍त होने की कगार पर हैं। 

उक्‍त निष्‍कर्ष कोलंबिया स्थित अंतर्राष्‍ट्रीय कटिबंधीय कृषि केंद्र द्वारा जारी किए गए हैं। इस रिपोर्ट में एक नक्‍शा भी दिया गया है जिसके आधार पर फसलों के जंगली सम्‍बंधियों के संरक्षण की प्राथमिकतांए तय की जा सकती हैं। इस अध्‍ययन में आलू, सेब, गाजर और सूरजमुखी जैसी कई फसलों को शामिल किया गया है जिनके जंगली सम्‍बंधियों का संग्रह बहुत अधिक नहीं किया गया है। दूसरी ओर, ज्‍वार और केले जैसी कुछ फसलें ऐसी भी हैं जिनके जंगली सम्‍बंधी बहुत कम हैं। 

कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां कृषि की शुरूआत हुई थी मगर आज यहां उन फसलों के जंगली सम्‍बंधियों का संग्रह न के बराबर है। इनमें सायप्रस, तुर्की, बोलीविया और भारत शामिल हैं। इनके अलावा उत्‍तरी ऑस्‍ट्रेलिया और पूर्वी यूएस में भी कोई प्रजातियों के संरक्षण की जरूरत है। 

अंतर्राष्‍ट्रीय कटिबंधीय कृषि केंद्र के शोधकर्ताओं ने उक्‍त जानकारी के लिए दो सालों तक विभिन्‍न बीच बैंकों, हर्बेरियम और संग्रहालयों में मौजूद प्रजातियों के आंकड़ों का उपयोग किया है। इसके अलावा उन्‍होंने यह भी देखा कि कोई किस्‍म प्राकृतिक परिवेश में कब देखी गई। इन सबके आधार पर उन्‍होंने उन फसल प्रजातियों की पहचान की जिनके संरक्षण को तत्‍काल प्राथमिकता देने की जरूरत है। इस साल के अंत तक वे 60 अन्‍य प्रजातियों के बारे में भी ऐसा विश्‍लेषण पूरा कर लेंगे। 

शोधकर्ताओं का मत है कि इन जंगली किस्‍मों का संरक्षण बीज-जीन बैंकों के साथ-साथ प्राकृतिक परिवेश में भी करने की जरूरत है। इनके प्राकृतवासों के विनाश के चलते ही इनके अस्तित्‍व पर संकट मंडरा रहा है।

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Sunday, 11 March 2018

अमेरिका और ब्रिटेन रूस पर प्रतिबंध जारी रखने में सहमत


अमेरिका और ब्रिटेन ने रूस पर प्रतिबंधों को तब तक जारी रखने का फैसला किया है जब तक कि रूस यूक्रेन में अपना अतिक्रमण बंद नहीं कर देता। अमेरिका और ब्रिटेन का कहना है कि मास्‍को ने यूरोप के अंतर्राष्‍ट्रीय नियमों का अल्‍लंघन किया है और एक संप्रभु राष्‍ट्र के मामले में जबरन हस्‍तक्षेप किया है। राष्‍ट्रपति बराक ओबामा ने 17 जनवरी को वॉशिंगटन में ब्रिटिश प्रधानमंत्री ड‍ेविड कैमरन के साथ व्‍हाइट में कहा, रूस जब तक यूक्रेन में अपना अतिक्रमण समाप्‍त नहीं करता है, तब तक हम उस पर प्रतिबंध जारी रखने पर सहमत हैं। महत्‍वपूर्ण आर्थिक और लोकतांत्रिक सुधानों को लागू करने के लिए यूक्रेन को मदद की जरूरत है।

कैमरन ने यूरोप में कहा, रूस ने अंतर्राष्‍ट्रीय नियमों का उल्‍लंघन किया है और एक संप्रभु राष्‍ट्र के मामलों में जबरन हस्‍तक्षेप किया है। उन्‍होंने कहा, यह हमारी समृद्धि और स्थिरता के लिए खतरा है। इसे सभी देशेां को समझने की जरूरत है और यूरोप में कोई भी अपने इतिहास को नहीं भूल सकता। ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने कहा, इसलिए हम यूरोप पर लगातार दबाव बनाए रखेंगे ताकि इस संकट का कूटनीतिक हल निकल सके।

ऑनलाइन सेवाओं की कूट भाषा हो : साइबर खतरे को देश की सबसे गंभीर सुरक्षा चुनौतियों में से उक बताते हुए अमेरिकी राष्‍ट्रपति बराक ओबामा और ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने लोगों को निजता बनाए रखने और आतंकियों का पता लगाने के लिए निजी कंपनियों द्वारा ऑनलाइन सेवाओं की कूट भाषा तैयार करने को कहा है। ओबामा ने शुक्रवार को कहा, मुझे लगता है कि सतत प्रारूप में हमें ऐसी चीज तलाशना है जहां हमारे लोगों को अपनी सरकार में विश्‍वास हो कि वह उनकी रक्षा कर सकते हैं लेकिन साइबर जगत में अपनी क्षमता का दुरूपयेाग नहीं करेंगे। पूरी तरह से इस नई दुनिया के कारण इसके लिए बनाए गए पारंपरिक कानूनों को फिर से आज के हालात के अनुकूल बनाने की जरूरत है। उन्‍होंने कहा, अमेरिका और ब्रिटेन दोनों जगहों पर चर्चा की जरूरत है।

ओबामा ने कहा, अमेरिका में कंपनियां कम से कम यह सुनिश्चित करें कि उनकी लोगों के प्रति जिम्‍मेदारी है। उन्‍होंने कहा, कंपनियों को चाहिए कि उनके उपभोक्‍ता जिन उत्‍पादों का इस्‍तेमाल कर रहे हैं वह उनकी अपेक्षाओं पर खरा उतरें।

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विज्ञान भारत को आर्थिक आज़ादी दिलाएगा - प्रधानमंत्री


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैज्ञानिकों से समाज के अंतिम छोर तक के व्‍यक्ति तक विज्ञान का लाभ पहुंचाने का आव्‍हान किया। मुंबई में 3 जनवरी को 102वीं विज्ञान कांग्रेस का उद्याटन करते हुए मोदी ने कहा कि विज्ञान की मदद से ही देश की गरीबी दूर की जा सकती है। 

प्रधानमंत्री ने चीज के हालिया विकास का जिक्र करते हुए वैज्ञानिकों को सीधा संदेश दिया है कि प्रगति करने के लिए हमें चीन के नक्‍शे कदम पर चना होगा। चीन आज विश्‍व की दूसरी बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था के रूप के उभर चुका है। इसके पीछे उसकी सफलता का राज यह है कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी उसने उसी तेजी से कार्य किया है। 

विज्ञान कांग्रेस के सालाना जलसे को संबोधित करते हुए श्री मोदी ने कहा कि देश के गरीबी और भुखमरी दूर करने के लिए विज्ञान के प्र‍गति जरूरी है। यह एक बच्‍च को जीवित रखने के अवसर भी बढ़ाती है। यह हमें दुनिया में किसी भी कोने में अपने प्र‍िय से जोड़ती है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विज्ञान कांग्रेस के सत्र के दौरान नोबेल विजेता वैज्ञानिकों और विदेशो में बसे भारतीय मूल के बड़े वैज्ञानिकों से आधे घंटे तक अनौचारिक बातचीत की। प्रधानमंत्री ने नोबेल विजेता एवं भारतीय मूल के वैज्ञानिकों को कहा कि जब युरोप और अमेरिका में सर्दी ज्‍यादा हो तब वे शोध के लिए नई दिल्‍ली में आएं। पिछले सौ सालों में डेढ़ सौ से ज्‍यादा नोबेज विजेता विज्ञान कांग्रेस में आ चुके हैं। प्रधानमंत्री हमेशा इस सालाना जलसे का उद्याटन करते हैं लेकिन नोबेल विजेताओं से पहली बार उन्‍होंने आधा घंटे तक बैठक की और विज्ञान एवं तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़ने के नुस्‍खों पर उनसे चर्चा की। मोदी की यह पहल नई है। इस बातचीत में पांच नोबेल विजेता और चार भारतीय मूल के विदेशी वैज्ञानिक शाामिल थे। जो नोबेल वैज्ञानिकों की बराबरी के स्‍तर के हैं। 

श्री मोदी ने मेक इन इंडिया कार्यक्रम पर भी चर्चा की। इन वैज्ञानिकों में ब्रिटेन के सर पॉल नर्स को 2001 में चिकित्‍सा का नोबेल पुरस्‍कार मिला था। उनका शोध कैंसर से इलाज में सहायक है। इसी प्रकार 2013 का चिकित्‍सा का नोबेल पाने वाले अमेरिका के रैंडी डब्‍ल्‍यू शेकमैन ने कोशिकाओं की परिवाहन प्रणाली और उसके विनियमन के लिए मशीनरी पर शोध किया है। अन्‍य वैज्ञानिकों में स्विट्जरलैंड के कर्ट बुदरिक और इस्‍त्राइल की ऐडा ई योनाथ शामिल हैं। ऐडा को भारतीय मूल के रामकृष्‍ण वेंकटरमण और थॉमस स्‍टैज के साथ संयुक्‍त रूप से नोबेल मिला था। अन्‍य चार भारतीय मूल के वैज्ञानिकों में एबेल प्राइज विजेता एस.आर.एस. वर्धन, रोल्‍फ नेवानल्निना प्राइज विजेता सुभाष खोट, फील्‍ड मेडलिस्‍ट मंजुल भार्गव तथा रोल्‍फ नेवानल्न्निा प्राइज विजेता मधुसूदन शामिल हैं। इन वैज्ञानिकों को मोदी ने गोल्‍ड मेडल से सम्‍मानित किया। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि कृषि उत्‍पादन को बढ़ाए जाने की जरूरत है जो किफायती हो और लोगों के जीवन को बेहतर बना सके। उन्‍होंने कहा कि शिक्षा का विस्‍तार, स्‍वच्‍छ ऊर्जा एवं टिकाऊ आवास प्रदान करने में विज्ञान की भूमिका अहम है। लेकिन कभी-कभी विज्ञान असमानता बढ़ाने, पर्यावरण के लिए खतरा पैदा करने या जलवायु परिवर्तन जैसे खतरों के लिए भी जिम्‍मेदार है।

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Friday, 9 March 2018

म०प्र० के युवा कलाकरों कि प्रतिभा


राज्‍य स्‍तरीय युवा महोत्‍सव का भोपाल में 6 जनवारी को समापन हुआ। मानव संग्रहालय में समापन समारोह के मुख्‍य अतिथि जल संसाधन मंत्री श्री जयंत मलैया एवं राज्‍य योजना आयोग के उपाध्‍यक्ष श्री बाबूलाल जैन ने राज्‍य स्‍पर पर प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्‍थान हासिल करने वाली प्रतिभाओं को सम्‍मानित किया। उत्‍सव में प्रदेश के 10 संभाग के कलाकारों ने 18 विभिन्‍न विधा में प्रस्‍तुति देकर दर्शकों का दिल जीत लिया। 

राज्‍य स्‍तरीय युवा उत्‍सव में प्रथम स्‍थान पाने वाले कलाकार रायपुर (छत्तीसगढ़) में राष्‍ट्रीय युवा उत्‍सव में भागीदारी करेंगे। 

समापन में उज्‍जैन संभाग की बालिकाओं ने मालवीय व्‍याह पर केंद्रित लोक नृत्‍य, उज्‍जैन के कलाकारों ने लोकगीत और रीवा (सतना) संभाग की कु. प्रिति सिंह ने भरतनाट्यम की प्रस्‍तुति दी। 

वित्त मंत्री श्री जयंत मलैया ने कहा कि प्रदेश में युवा प्रतिभाओं की कभी नहीं है। उन्‍होंने कलाकारों द्वारा प्रस्‍तुत मालवी लोक नृत्‍य, लोकगीत और एकल कत्‍थक नृत्‍य की सराहना की। उन्‍होंने कहा कि उत्‍सव के दौरान प्रदेश के जो कलाकार अपनी प्रतिभा के प्रदर्शन से सम्‍मानित हुए वे बधाई के पात्र हैं। 

श्री बाबूलाल जैन ने कहा कि सांस्‍कृतिक विविधताओं के देश में मध्‍य प्रदेश की अलग पहचान है। संचालक खेल और युवा कल्‍याण श्री उपेंद्र जैन ने बताया कि दो दिवसीय युवा उत्‍सव में द्रश के दस संभाग के करीब 650 कलाकार ने 18 विभिन्‍न विधा में प्रस्‍तुति दी। युवा उत्‍सव में मृदंगम में इंदौर संभाग के रविराज पंवार प्रथम, उज्‍जैन के राम दुलारे द्वितीय एवं ग्‍वालियर संभाग के श्री सलीम कुरैशी तृतीय रहे। तबला बादन में जबलपुर के हर्षित सोनी प्रथम, सागर के गगन राज द्वितीय और चम्‍बल संभाग के सद्दाम वारसी तृतीय रहे। 

गिटार बादन में प्रथम स्‍थान भोपाल के अम्‍बरीश कालेल, द्वितीय स्‍थान सागर की भागवना सोनी और तृतीय स्‍थान जबलपुर के गीतेश यादव ने प्राप्‍त किया। बांसुरी वादन में भोपाल के सुमित प्रथम, ग्‍वालियर के गौरव सिंह द्वितीय और उज्‍जैन संभाग के देवांशु यादव तृतीय रहे। 

हारमोनियम में उज्‍जैन के परमानंद गंधर्व ने पहला, भोपाल के अमल मलक ने दूसरा और सागर संभाग के रामू विश्‍वकर्मा ने तीसरा स्‍थान हासिल किया। सितार बादन में ग्‍वालियर संभाग के अनुराग बंसल प्रथम और उज्‍जैन संभाग के ललित मोदी द्वितीय रहे। वीणा वादन में भोपाल के श्री निनाद अधिकारी ने प्रथम स्‍थान अर्जित किया। 

शास्‍त्रीय गायन (हिन्‍दुस्‍तानी) में ग्‍वालियर की सुश्री रागनी देवले ने प्रथम स्‍थान प्राप्‍त किया। उज्‍जैन संभाग के प्रसन्‍नजीत भावक और भोपाल की के. वीणी राव ने द्वितीय एवं तृतीय स्‍ािान अर्जित किया। भरतनाट्यम में प्रथम स्‍थान भोपाल की सुप्रिया मंत्री, द्वितीय जबलपुर के अजित डोले और तृतीय स्‍थान रीवा संभाग की ऋतायंती चौधरी ने हासिल किया। कत्‍थक नृत्‍य में रीवा की प्रीति सिंह प्रथम, उज्‍जैन की रवीना भट्ट द्वितीय और इंदौर संभाग की आयुषी दीक्षित तृतीय स्‍थान पर रही। ओडिसी नृत्‍य के लिए इंदौर की अनुषा जैन को प्रथम और जबलपुर की अंकिता किनारा को द्वितीय स्‍थान के लिए सम्‍मनित किया गया। कुचीपुड़़ी नृत्‍य में प्रथम स्‍थान जबलपुर के अमित डोले, द्वितीय स्‍थान भोपाल की मालविका पिल्‍लई और तृतीय स्‍थान रीवा की एस. साई शिवानी ने अर्जित किया। मणिपुरी नृत्‍य में जबलपुर की गरिमा पटवा को प्रथम और उज्‍जैन के जितेद्र कौशल को द्वितीय स्‍थान मिला।

(Word Count - 514)